Friday, October 22, 2010

विश्वास से भरा एक नन्हा पौधा...........




















घना
था अँधेरा, जंगल बहुत बड़ा था,
कहीं
किसी कौने में, एक अंकुर फूट रहा था,

था आँधियों का कहर भी और कई मर्तबा धुप का असर भी कड़ा था,
फिर
भी अपने वजूद को बचाने में, एक अंकुर जी जान से लगा था!

अंकुर से नन्हे पौधे तक का सफ़र बहुत कठिनाइयों से भरा था,
किन्तु उस अंकुर के अन्दर आत्मविश्वास गज़ब का भरा था!

नहीं
झुका वो समक्ष आँधियों के,धुप के आगे भी अटल वो खड़ा था,
क्यूंकि, उस अंकुर के अन्दर मरने के भय से ज्यादा, जीने का उत्साह भरा था!

अपनी
एक पहचान बनाने को जंगल में सदियों से वो लड़ा था,
गुमनामियों
में रहते हुए भी मिलेगी पहचान-- हमेशा ही वो इसी आस से आगे बढ़ा था!

अस्तित्व तो कब का मिट गया होता, उस नन्हे से पौधे का,
किन्तु जंगल में भी वो अपने, आत्मविश्वास कि शक्ति से अब तलक,
सभी
पौधों के समक्ष अपना वजूद शान से जगमगाए खड़ा था ,
क्यूंकि उस पौधे का विश्वास किसी भी डर से कई- कई गुना बड़ा था!

Thursday, October 7, 2010

निशाना
















अब
चल पड़े हैं तो रूकेंगे कदम,
आँधियों और तूफानों के समक्ष कभी झुकेंगे हम!

मंजिलों को पाना हैं, लक्ष्य कि ओर निशाना है,
होती मेहनत कि जीत है, हमने तो बस इतना जाना है!

सच करना है हर सपने को तो, अपने अटल विश्वास को जगाना है,
आग में ताप कर खुद को, एक जगमगाता और बेशकीमती सोना बनाना है!

खुद पर भरोसा कर हमें हर मुश्किल को सामने से हटाना हैं,
अपनी मंजिल को हासिल करने के लिये खुद को काबिल बनाना है!

खुद पर हौंसला है रखना, औरों को भी आगे बढ़ाना है,
लोग आदर्श माने आपको बस खुद कि एक ऐसी पहचान बनाना हैं!

साथ दे दे चाहे ज़माना, हमको तो बस आगे बढते जाना हैं,
खुद पर रख भरोसा हमको अपने सपने को सच कर जाना हैं,

वादा कर लो खुद से बस इतना कि हर अँधेरे को तुम्हे,
अपनी जीत के प्रकाश से दूर भगाना हैं !

Saturday, September 18, 2010

ख्वाबों को हकीकत में बदल कर देख

अपने ख्वाबों को हकीकत में बदल कर तो देख,
अपनी सोच कि राहों पर आगे चल कर तो देख,

लोहे के पिंजरों की सलाखों में भी है उड़ने की राह,
तू बस अपने पंखो को ज़रा उड़ा कर तो देख ,

खुद ब खुद हल होंगी ज़िन्दगी की हर मुश्किलें ,
बस तू अपनी ख़ामोशी को सवालों में बदल कर तो देख,

चट्टानें भी टूट जायेंगी तेरी हिम्मत के सामने,
तू बस सच्चाई की राह पर चल कर तो देख,

अँधेरी राहों में भी चमकेगी रौशनी,
सूरज ना सही तू एक छोटा सा दीपक जलाकर तो देख,

होस्लें कम ना होंगे तेरें तूफ़ान के सामने,
खुद को तूफ़ान से ज्यादा मजबूत बना कर तो देख!

Sunday, August 15, 2010

खुद पर विश्वास रख!
















ज़िन्दगी
कि दौड़ में,
कदमों
की अक्सर आवाज़ नहीं होती,
मौसम
चाहे कोई भी आये, ज़िन्दगी उससे कोई सरोकार नहीं रखती !

समय कभी रुकता नहीं,
आसमान
कभी झुकता नहीं,
तो तू तो एक इंसान है, उस विधाता की एक अनमित पहचान है,
हे मनुष्य तू सर्वशक्तिमान है, फिर भी क्यूँ तू अपनी शक्तियों से अनजान है!

ये
दुनिया है जहाँ, काबिलों की होती है पहचान बस ,
खुद
में काबिलियत लाने का तू, कर कुछ प्रयास बस,
सब
कुछ मिल जाएगा तुझको ,बस थोडा सा खुद पर विश्वास रख!

Thursday, August 12, 2010

प्राथनाये कभी व्यर्थ नहीं जाती















जलती
है जब अग्नि, तो रौशनी बुझाई नहीं जाती,
बिना मिटटी के तो फसल भी उगाई नहीं जाती!

माना कि हर मंजिल आसान नहीं होती,
हर कोयले के अन्दर छुपी हीरे कि खान नहीं होती!

हर मशाल को रौशनी, करने के लिये जलना ही पड़ता है,
अपनी हस्ती को मिटा कर, दूसरो कि दुनिया उजागर करना ही पड़ता है!

ये ज़िन्दगी एक जंग का मैदान है,
यहाँ हर जीत को हासिल करने के लिये, परिश्रम करना ही पड़ता है!

परिश्रम करने के बाद भी मंजिल कब मिले कुछ कह नहीं सकते,
पर बस इंतज़ार के सहारे भी तो जिंदा रह नहीं सकते!

खुद पर यकीन कर के ही हम चल पड़े है आगे,
हम नहीं वो इंसा जो ,मुश्किलों से भागे,
नहीं इतने कमज़ोर हमारे विश्वास के धागे!

जो सच्ची है मेहनत तो, एक एक दिन जग में मिल जायेगी ख्याति,
किसी ने ठीक ही कहा है कि, सच्ची प्राथनाये कभी व्यर्थ नहीं जाती !!

Wednesday, August 11, 2010

दोस्ती करो तो कैसी !

















दोस्ती
एक अनमोल तोहफा होता है,
जिसका इस दुनिया में एक अहम् मोल होता है!

दोस्ती करना दुनिया का दस्तूर है,
किन्तु इसे निभाना थोड़ा मुश्किल जरूर है!

दोस्ती करो तो कृष्ण भगवान् जैसी,
भक्ति करो तो हनुमान जैसी,
मर्यादा स्थापित करो तो श्री राम जैसी,

करो ऐसी दोस्ती जिससे संस्कारों का जग में उत्थान हो,
करो किसी से दोस्ती गर जग में दोस्ती का तुम सम्मान करो,

इसी संकल्प के साथ एक नए युग कि और तुम प्रस्थान करो !

सूरज ना बन पाए तो ना सही,
हो सके तो दीपक बनकर ही तुम रौशनी का दान करो!

करो जो दोस्ती किसी से तो उसे निभाने का प्रयास करो ,
किन्तु अपने आदर्शों को रखो सबसे सर्वोच्य,
इसमें कभी ना कोई समझोता तुम स्वीकार करो!

Monday, August 2, 2010

खुद पर भरोसा करो



















कोई
भी इंसान कमज़ोर या ताकतवर नहीं होता,
ज़िन्दगी जीने के हौंसले, ये पहचान बनातें हैं उसकी,

ये जीने के हौंसले....
किसी
को तो शोहरत की बुलिन्दयों तक पहुंचा देतें हैं ,
और किसी की आँखों को अनगिनत आंसू दे जाते हैं ,

किन्तु कोई भी हालात, इंसान के इरादों से ज्यादा मजबूत नहीं होतें,
जो लोग करतें हैं खुद पर यकीन, वो बुरे हालातों के समक्ष भी मजबूर नहीं होतें!

जिनकी चाहत है उड़ने की जहाँ में ,वो उड़ान भर ही लेतें हैं,
पंख भले ही दे साथ उनका शुरूआत में,
किन्तु अपनी बार- बार की कोशिशों से,
वो उन निर्जीव पंखो में भी,एक एक दिन जान भर ही लेतें हैं!

जिनको होता है खुद पर भरोसा,
वो अपनी तय हर मंजिल को हासिल कर ही लेतें है!

Saturday, July 31, 2010

कुछ ख़ास बनो !



















आस
से जुड़ीं, हर एक विशवास होती है,
हर इंसान में, कुछ ना कुछ बात ख़ास होती है!

ये सच है की, हर सुबह के बाद ही रात होती है,
ग्रीष्म ऋतू के जाने के पश्चात ही बरसात होती है!

लोग खुद को कभी हिन्दू, कभी मुस्लिम
तो कभी सिख तो कभी इस्साई करार देतें हैं ,
इन्हीं के बीच कहीं अपनी असली पहचान-" इंसान"
होने का सबूत भूल जातें हैं !

भूल जातें है मानव से मानव का रिश्ता,
अपना वजूद भूल जातें हैं!
मैं पूछती हूँ----
क्या मानवता से बड़ी धर्म और जाती होती हैं,
क्यूँ सच के लिए लड़ना आज इन्सां के लिए एक आहुति होती है,
क्यूँ सब कुछ होते हुए भी आज हर इन्सान की ज़िन्दगी एक चुनौती होती है,

चुनौतियों को पार कर के ही, मंजिलें हर घड़ी पास होती हैं,
राहों में पड़ी कहीं कटीली झाड़ियाँ तो कहीं मुलायम घास होती है!
किसी ने सच ही कहा है की -
जिस इंसान के पास विश्वास की मजबूत तलवार होती है ,
उसकी जीत हर जगह हर बार होती हैं!

उसकी पहचान किसी एक धर्म ,एक देश ,एक भाषा की मोहताज़ नहीं होती,
बल्कि सारी दुनिया के लिए ख़ास होती हैं!

"जीत ले सारी दुनिया को तू खुद में इतनी आस पैदा कर,
कुछ तो है ख़ास तुझ में ऐसा आत्मविश्वास पैदा कर ! "