Thursday, October 7, 2010

निशाना
















अब
चल पड़े हैं तो न रूकेंगे कदम,
आँधियों और तूफानों के समक्ष न कभी झुकेंगे हम!

मंजिलों को पाना हैं, लक्ष्य कि ओर निशाना है,
होती मेहनत कि जीत है, हमने तो बस इतना जाना है!

सच करना है हर सपने को तो, अपने अटल विश्वास को जगाना है,
आग में ताप कर खुद को, एक जगमगाता और बेशकीमती सोना बनाना है!

खुद पर भरोसा कर हमें हर मुश्किल को सामने से हटाना हैं,
अपनी मंजिल को हासिल करने के लिये खुद को काबिल बनाना है!

खुद पर हौंसला है रखना, औरों को भी आगे बढ़ाना है,
लोग आदर्श माने आपको बस खुद कि एक ऐसी पहचान बनाना हैं!

साथ दे न दे चाहे ज़माना, हमको तो बस आगे बढते जाना हैं,
खुद पर रख भरोसा हमको अपने सपने को सच कर जाना हैं,

वादा कर लो खुद से बस इतना कि हर अँधेरे को तुम्हे,
अपनी जीत के प्रकाश से दूर भगाना हैं !

Saturday, September 18, 2010

ख्वाबों को हकीकत में बदल कर देख

अपने ख्वाबों को हकीकत में बदल कर तो देख,
अपनी सोच कि राहों पर आगे चल कर तो देख,

लोहे के पिंजरों की सलाखों में भी है उड़ने की राह,
तू बस अपने पंखो को ज़रा उड़ा कर तो देख ,

खुद ब खुद हल होंगी ज़िन्दगी की हर मुश्किलें ,
बस तू अपनी ख़ामोशी को सवालों में बदल कर तो देख,

चट्टानें भी टूट जायेंगी तेरी हिम्मत के सामने,
तू बस सच्चाई की राह पर चल कर तो देख,

अँधेरी राहों में भी चमकेगी रौशनी,
सूरज ना सही तू एक छोटा सा दीपक जलाकर तो देख,

होस्लें कम ना होंगे तेरें तूफ़ान के सामने,
खुद को तूफ़ान से ज्यादा मजबूत बना कर तो देख!